फिर बरसने को,वो दिन आ गए है.
हम चलतें चलतें वहीं आ गए है।
मिले थे जो कुछ, लम्हें खुशी के.
भिगोने को अब नीरद, ले नीर आ गए है।
ये थम थम कर जो हो रही है बारिश.
तबियत को तंग ये ना आज करदे।
कि अब ना रही है उभरने की हिम्मत.
इरादों ने अभ्यर्पण अब कर दिये है।
Nyc.....
ReplyDeleteThnks....
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