Thursday, 25 June 2020

कैसे गुजारते ये ज़िन्दगी।


कयासों में कब तक, गुजारते ये ज़िन्दगी,
हकीकत के चार लम्हें, बहुत हैं गहरी नींद को।

Friday, 24 April 2020

मंदिर मस्जिद

दो वक़्त की रोटी जिसे नसीब ना हो खाने में।
उसे क्या फर्क पड़ता है, मंदिर मस्जिद बन जाने में।

Monday, 21 August 2017

शान-ए-पीर।

ना जलते चिराग शान-ए-पीर के लिए.

गर पीर हयात के रहनुमा ना होते।

Tuesday, 8 August 2017

सावन, बरसात और तुम।।।

आज सावन की आखिरी बरसात हुई।
और मुझे तुम्हारा ख्याल आया।
ये बारिश
और तुम 
अब अगले 
बरस ही
आओगे।।

Thursday, 3 August 2017

मिश्रा बन गईं हो शेरों की।

छोड़ के फिर जाओगे तुम,
इन सर्द हवा सी बातों को,
काटेंगे कैसे हम तन्हा, 
उलझन संग अपनी रातों को,
क्या, डर रखते हो बर्बादी का,
या हो मेहरम तुम गैरों की,
चलो जातें जातें सुनते जाओ,
मिश्रा बन गईं हो तुम,मेरे शेरों की।

कैसे गुजारते ये ज़िन्दगी।

कयासों में कब तक, गुजारते ये ज़िन्दगी, हकीकत के चार लम्हें, बहुत हैं गहरी नींद को।