रात कि समझ और दिन का ख्वाब टुटे तो दुख होता है मालिक ।
या मेरी समझ लेले या ख्वाब दिखाना छोड़ दे|
Sunday, 13 March 2016
Saturday, 5 March 2016
कर बैठते है।
मेरी खामौशी, मेरी मजबुरी है महज.
लोग तो मजबुरी मे आत्मदाह कर बैठते है।
तेरा चंचल स्वभाव है, कमजोरी मेरी.
लोग इस स्वभाव पर बातों का आगाज कर बैठते है।
तहजीब निगाहों की तेरी, बंदिस बन गई मेरी.
लोग इन निगाहों से प्यार कर बैठते है।
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कैसे गुजारते ये ज़िन्दगी।
कयासों में कब तक, गुजारते ये ज़िन्दगी, हकीकत के चार लम्हें, बहुत हैं गहरी नींद को।