Tuesday, 7 June 2016

गर मर भी जाऊँ ...

गर मर भी जाऊँ.
तो युही ना फुँक देना.
मेरे अंग तरंग को किसी मे सींच देना.
तमन्ना बड़ी थी जीने की मगर.
ये साँस ही सिमित थी.
चार दिन जीने के तकदीर मे लिखी थी.
गर मर भी जाऊँ।

सींचे अंग मेरे किसी के काम आएंगे.
बेरंग दुनिया किसी की रंगों से भर जाएगी.
दौड़ेगी धड़कन किसी की.
कई बदन रंग पाएगे.
गर मर भी जाऊँ.
तो युही ना फुँक देना.
मेरे अंग तरंग को किसी मे सींच देना।

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