Sunday, 13 March 2016

दुख होता है ।

रात कि समझ और दिन का ख्वाब टुटे तो  दुख होता है मालिक ।
या मेरी समझ लेले या ख्वाब दिखाना छोड़ दे|

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कैसे गुजारते ये ज़िन्दगी।

कयासों में कब तक, गुजारते ये ज़िन्दगी, हकीकत के चार लम्हें, बहुत हैं गहरी नींद को।