मुख्य अड़चने भारत में बड़ती जनसंख्या, जातिवाद, भेदभाव, परिवारवाद, राजनीति में तुछ सोच रखने वाले लोग व आरक्षण कि सुविधा का अपने वोट बैंक के लिए अवधिर्विधि करने वाली सरकारे ।
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1)
बड़ती जनसंख्या किसी भी उभरते देश के रास्ते की अड़चन बन सकती है. किसी भी घनी जनसंख्या वाले उभरते देश की मुश्किल है उसकी जनसंख्या को नियंत्रित रखना।
2)
जनसंख्या र्विधि को नियंत्रित करने के लिए लोगो को जागरुक करना व उनका देश के प्रति कर्तव्यों से सजग कराना।
3)
युवाऔ को देश की सम्पति मान कर उनका पालनपौशन करना, व युवाऔ का देश के प्रति कर्तव्यों का अहसास कराना।
4)
जनसंख्या को नियंत्रित करने के कठोर कानुन लाना भारत के लिए एक चुनौती।
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1)
69 वर्ष आजादी के बाद भी भारत जातिवाद से निपटने मे विफल रहा है।
2)
जाति को भारत में व्यक्ति के पहचान के रुप में प्रयोग किया जाता है, जैसे कि पुलिस के कामकाज में सबसें पहले व्यक्ति की जाति पुछी जाती है।
3)
इस प्रकार कि कार्य शैली किसी भी देश को एक धागे में नही पिरो सकती।
4)
जाति आधारित जनगणना एक भदा उदहारण है, जनगणना में भला जाति का क्या काम।
5)
संख्या (जन) कि बड़ती है और जन में सभी लोग होते है इसमें जाति आधारित गणना करना अनुचित है।
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1)
भेदभाव किसी भी रुप में हो वह हमेसा विकास कि गति को धीमा करेगा।
2)
उदहारण के तोर पर उतर भारत में बिहार प्रात के लोगो के साथ सोतेला व्यवहार का होना।
3)
महाराष्ट्र में उतर भारतिंयो सें वैसा ही व्यवहार होना जैसे उतर भारतीय बिहार के लोगो से करतें है।
4)
धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र होने के बावजुद हिंदु, मुसलिम में भेदभाव व कट्टरपन का होना।
5)
भेदभाव का उदहारण(photo-1)
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1)
राजनीति में परिवार को आड़ बनाकर चुनाव लड़ना और अवसर के अनुसार चलना देश हित में नही हैं।
2)
नीजि व्यवसायों में अपनें परिवार के व अपनें जानकारो को भर्ती करवाना व पक्ष लेना।
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1)
तुछ सोच रखने वाले लोग देश के विकास में रोड़ा है, उनकी सोच उनके विवेक को दरसाती है।
2)
राजनीति में तुछ सोच के साथ आज कल के नेता बस अपनी जेब भरने आते है।
3)
किसी भी देश हित के मुद्दे पर ये लोग एकत्रित होने में अरसों लगा देते है परन्तु अपने वेतन र्विधि के प्रस्ताव को रातों रात एक सुर में स्वीकृति देने में एक हो जाते है।
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1)
आज आरक्षण देश के लिए जहर बन रहा है, आर्थिक तौर पर मजबूत समाज भी आरक्षण की मांग करने लगा है।
2)
संविधान में आरक्षण 10 वर्ष के लिए दिया गया और इसे 10 वर्ष के बाद आरक्षित वर्ग के हालातों को देखते हुए इस सुविधा को बड़ाना या खत्म करना सरकार कि जिम्मेदारी रखी गई।
3)
परन्तु इस सुविधा का सरकारों ने अपनी वोट बनाने के लिए ज्यादा प्रयोग मे लिया बजाए कि इसे शोषित वर्ग का कल्याण कर के इस सुविधा को खत्म करने के।