Wednesday, 14 September 2016

बात शहीदों की...

यू तो लिखी है हर जमाने ने कविताएँ .
पर उन शहीदों की लिखावट महान थी।

जवानी मे लोग करते है इश्क की चाहते.
उनके इश्क मे ही देश आजादी की पहचान थी।

सीने मे जलते वो बेतकल्लुफ़ी के शोले.
आशिक-ए-बेताब इन वीरों की वजा़ थी।

हजारों जो बहके थे इन्कलाब के प्याले से.
तेवर मे उनके बिजली सी गरजा थी।

टुटे ना वो, इक आह न निकली जबान से.
जो जिन्दा रखे थी उनकों वो ही लिखावट उनकी पहचान थी।

एक सपना जो था उन जवान आखों मे.
हिन्द हो आजाद अपना, हिन्दीयों का राज हो.

यू तो लिखी है हर जमाने ने कविताएँ .
पर उन शहीदों की लिखावट महान थी।

(बेतकल्लुफ़ी- आजादी से)
(वज़ा- निर्माण )

~विकास

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कैसे गुजारते ये ज़िन्दगी।

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