थी प्यारी, जो प्यारी हम खुद में समझते, उस प्यारी, ने हमारी ,प्यारी निन्दे ही चुरा ली। ~विकास~
कयासों में कब तक, गुजारते ये ज़िन्दगी, हकीकत के चार लम्हें, बहुत हैं गहरी नींद को।
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